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Thursday, November 11, 2010

फूलों की माला

रोगी (डॉक्टर से)- डॉक्टर आप मेरे मित्र हैं। आपको फीस देते हुए संकोच होता है। इसलीये मैंने सोचा है की अपने वसीयतनामे में मैं आपका यह कर्जा भी चुका दूं। आज मैंने वह वसीयतनामा भी तैयार करा दीया है।
डॉक्टर (रोगी से)- अगर ऐसी बात है ग्रोवर साहब, तो मैं आज से आपकी दवा भी बदल रहा हूं।
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रमेश (डॉक्टर से)- डॉक्टर साहब! ये फूलों की माला किस के लिए ?
डॉक्टर (रमेश से)- ये मेरा पहला ऑपरेशन है, सफल हुआ तो मेरे लिए, नहीं तो तुम्हारे लिए ।